Add To collaction

शार्ट स्टोरी लेखन चेलैन्ज भाग 7 सौतेली बेटी

              आरजू अर्नव का उत्तर सुनकर बहुत परेशान होगयी। वह सोचने लगी यदि यह मेरा सगा भाई होता तो आज मै इसके गाल पर दो थप्पड़ मारकर पूछती कि आज तुझे इस माँ को अकेले छोड़ते शर्म महसूस नही होरही  है। जिस माँ ने तुम दौनौ के लिए क्या क्या नही किया था आज उसी माँ के साथ रहने में तुम दौनौ को शर्म आ रही है।


      आरजू असल में अर्नव व अभिनव की सौतेली बहन थी। आरजू ने उन दोनौ के पास आने की जितनी कोशिश की थी  वे दौनौ उससे उतने ही दूर भागते थे। उन दौनौ ने उसे कभी अपनी बहिन माना ही नही था।जबकि आरजू आज भी उन दौनौ के लिए रा खी भेजना नही भूलती थी।
  आरजू का पूरा जीवन अत्यन्त दुःख व परेशानियौ से बीता था आरजू के पापा एक अच्छी कम्पनी में जाँब करते थे आरजू की मम्मी एक  साधारण गृहणी थी। आरजू की मम्मी एकता को सजने समरने का कोई शौक नहीं था।

    उसे प्राकृतिक सुन्दरता से बहुत लगाव था। वह बनावटी लोगौ से हमेशा दूर रहने की कोशिश करती थी।  आरजू जब सात बर्ष की रही होगी एकता उसको छोड़कर ईश्वर को प्यारी होगयी।

   आरजू के पापा ने दोस्तौ के कहने पर दूसरी शादी करने की सोची। एक लंड़की उनको दिखाई गयी। लड़की का नाम शारदा था। शारदा के सपने कुछ और ही थे लेकिन गरीबी के कारड़ वह ऊँची उडा़न नही उड़ सकी और उसकी इच्छा के बिरुद्ध  उसके पंख काट दिये और उसकी शादी आरजू के पापा के साथ करदी गयी।

    आरजू के पापा विनय ने सुहागरात को ही शारदा की गोद में आरजू को डाल दिया ।और इस तरह एक अल्लढ़ युवती को बिना सोचे समझे एक बेटी की माँ बना दिया।

 आज जब विनय की मौत के बाद अरनव अभिनव दौनौ अपनी अपनी फैमीली के सा थ जाने लगे तब आरजू  ने  दौनौ भाईयौ से यही पूछा था कि माँ यहाँ अकेली किसके साथ रहेगी।तब दौनौ बेटौ ने नाक सिकोड़ली और कहा था  हम बहुत ऊँची सुसाइटी में रहते है वहाँ माँ को कैसे रख सकेगे।  लोग  हमारे बारे में क्या सोचेगे़ं

    तब आरजू ने पूछा था यह बीमार रहती है अकेली कैसे रहेगी इनकी देखभाल कौन करेगा कौन डाक्टर के पास लेकर जायेगा।  तब दौनौ ने कोई जबाब नही दिया था और वहाँ से चलेगये।

      आरजू ने माँ से कहा," माँ तू मेरे साथ चलेगी। मै तुझे लेकर जाऊँगी।

तब शारदा की आँखौ में आँसू बहने लगे और बोली ," नही आरजू मै तेरे साथ नही जाऊँगी मैने तुझे आजतक बेटी माना ही कब था और तू मुझे लेजाने के लिए तैयार है।मैने तुझे दिया ही क्या था। मैने तुझे हमेशा घृणा से देखा था । मैने जिन बेटौ को तुझे कभी बहिन नही कहने दिया वह बेटे आज मुझसे उसी तरह दूर होगये है।यह सब मेरे अपने कर्मौ का फल है ।मुझे अकेले भोगने दो। मैने तुझे नफरत के सिवाय और दिया ही क्या था मै तुझे पढ़ने से भी रोकती थी क्योकि तुझे घर के काम में लगाये रखती थी परन्तु तू रातौ मे पढ़ती थी। आज जो मुकाम तूने हासिल किया है वह सब तेरी महनत व लगन का है। आज मुझे अपने इस जीवन की सोच से घृणा होरही है। नही मै तेरे साथ किस मुँह से जाऊँगी। मैने तुझे सौतेली बेटी से अधिक परेशान किया था। परन्तु तूने मुझे आजतक लौट के जबाब नही दिया था।

        आरजू बीच मे बात काट कर बोली,"  नही माँ ऐसा मत कहो जो तुमने मेरे साथ किया उसमें तुम्हारी क्या गलती थी। यदि तूम्हारी जगह मै होती तब यही करती जो तुमने कियाथा। पहले तो मुझे भी तुम पर क्रोध आता था जब मै समझदार हुई तब मेरी समझ मे आया कि आपके साथ उस समय बहुत गलत किया गया था। तुम्हारी मर्जी के बिना सुहागरात को ही  तुमको एक बेटी की माँ बनादिया।

      हर लड़की के अपने सपने होते है मुझे पता चला आपका सपना था आई  एस  बनने का लेकिन आपको चौका चूल्हे में झौक दिया।  मै आपके सौतेली बेटी हौने से पहले एक औरत हूँ और एक औरत ही दूसरी औरत का दर्द समझ सकती है।  माँ मुझे सब पता चलगया था तुम्हारी इस घर में कोई नहीं सुनता था आखिर में तुम अपना गुस्सा मुद पर ही निकालती थी।और कौन था जिससे आप कुछ कह पाती थी। माँ अब पुरानी बातौ को भूल जाओ ।मेरा भाग्य ही कमजोर था जो मेरी माँ मर गयी थी। इसमें आपका कोई दोष नही है।

    मैने आपको लेजाने के लिए सब इन्तजाम कर दिया है । तुम अपना छोटा मोटा सामान बांध लो। हम यहाँ से कल जायेगे।और पापा को जोभी कुछ करना है वही करवा दूँगी।

नरेश शर्मा
01/05/२०२२
शार्ट स्टोरी लेखन चेलैन्ज भाग ७
 जानर
सामाजिक

   9
6 Comments

Sandhya Prakash

04-May-2022 06:27 PM

Bahut khoob

Reply

Naresh Sharma "Pachauri"

02-May-2022 08:41 PM

सभी साथियौ को बहुत बहुत धन्यवाद

Reply

Renu

02-May-2022 03:32 PM

👍👍

Reply